ऑपरेशन दीपके: नीट विवाद और छात्र आंदोलन का सच खबर का सारांश दिल्ली में नीट (NEET) परीक्षा लीक विवाद के बाद उपजा जनाक्रोश अब एक नए राजनीतिक मोड़ पर है। अमेरिका से लौटे 33 वर्षीय एनआरआई अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले 'ऑपरेशन दीपके' और 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बीच इस आंदोलन के भीतर से ही बगावत के सुर उठने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि बैकग्राउंड में चल रही एक सोची-समझी राजनीतिक बिसात का हिस्सा है। मुख्य बातें और आंतरिक बगावत नीट मामले पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कथित बयानों के बाद उपजे आक्रोश के बीच अभिजीत दीपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन किया। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर लाखों समर्थकों का दावा किया गया। हालांकि, संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लाठीचार्ज और आंसू गैस की झड़पों के बाद आंदोलन में दरार आ गई। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता 'दहिया' को अचानक निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने नेतृत्व पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए: दिखावे का सत्याग्रह: कैमरों के सामने गांधीवादी ढोंग और बंद कमरों में कचौरी-नींबू पानी का आनंद। कार्यकर्ताओं की अनदेखी: सड़कों पर छात्रों पर लाठीचार्ज के समय प्रवक्ता का फास्ट-फूड आउटलेट में बर्गर खाना। फर्जी साहित्य: बी.आर. आंबेडकर के नाम पर गलत किताबों का प्रचार।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा - आगे क्या?